बिहार के गणितज्ञ जिन्होंने आंइस्टीन को दी चुनौती,अंत समय PMCH से पार्थिव शरीर ले जाने को नहीं मिली थी एंबुलेंस

बिहार के विभूति, भारत की शान आइंस्टाइन की सिद्धांत को चुनौती देने वाले, वैश्विक पटल पर गणित में विशेष उपलब्धि एवं ख्याति पाने वाले महान गणितज्ञ वशिष्ठ नारायण सिंह थे। देश का एक विख्यात गणितज्ञ जो गुमनामियों की गलियों में खो गया। वशिष्ठ नारायण सिंह मूलत: बिहार के आरा (भोजपुर) के बसंतपुर के निवासी थे।

वशिष्ठ नारायण सिंह की प्रतिभा का डंका देश ही नहीं अपितु पूरे दुनिया में बजा। किंतु वे युवावस्था से ही मानसिक रोग से ग्रसित हो गए और अपने जीवन का अधिकांश हिस्सा पागल की तरह बिताया।
वे पटना साइंस कॉलेज में अध्ययनरत थे तभी 1965 में कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी (USA) चले गये एवं पीएचडी की उपाधि हासिल की और महान गणितज्ञ के रूप में चर्चित हुए। इस दौरान उन्होंने नासा में भी काम किया, लेकिन मन नहीं लगा और अपने वतन भारत लौट आए। भारत में उन्होंने IIT कानपुर, IIT मुंबई जैसे बड़े संस्थानों में भी काम किया।


वशिष्ठ नारायण सिंह के निजी जीवन की बात करें तो उन्होंने 1973 में वंदना रानी सिंह से शादी रचाई। उनकी आसामान्य है दिनचर्या व व्यवहार के चलते उनकी पत्नी ने महज एक साल के अंदर ही उनका साथ छोड़ दिया।


प्रतिभा के पावर हाउस कहे जाने वाले वशिष्ठ नारायण सिंह अपने गांव में ही उपेक्षित जीवन का सामना कर समय व्यतीत कर रहे थे। नवंबर 2019 को उन्हें तबीयत खराब होने के चलते राजधानी के पीएमसीएच अस्पताल ले जाया गया जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। यहां भी उनको सरकार के सिस्टम से उपेक्षा ही हाथ लगी, निधन के पश्चात एंबुलेंस भी नहीं मिल रही थी।


इस तरह एक महान वैज्ञानिक का दर्दनाक अंत हो गया। यह उनके परिवार ही नहीं बल्कि संपूर्ण देश के लिए एक अपूरणीय क्षति थी। उनकी जीवन भावी पीढ़ी को प्रेरित करती रहेगी।

बिहार खबर टीम की ओर से वशिष्ठ साहब को सलाम पहुँचे।

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